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Shama-Parwana Shayari

बेसबब इश्क़ में मरना तो मुझे मंज़ूर नहीं,
शमा तो चाह रही है कि परवाना हो जाऊँ।
हमराह तेरे फूल खिलाती थी जो दिल में,
अब शाम वहीं दर्द से ख़ाली नहीं जाती।
जो किस्मत में जलना ही था तो शमा होते,
कि पूछे तो जाते किसी अंजुमन में हम।
हम जान से जाएंगे तभी बात बनेगी,
तुमसे तो कोई बात निकाली नहीं जाती।
शमा बुझा के रात देर तलक महफ़िल सजाई हमने,
मैं अपने दिल को रोता रहा और ये दिल तेरे लिए।
गर्मी-ए-शम्मा का अफसाना सुनाने वालो,
रक्स देखा नहीं तुमने अभी परवाने का।
बड़ी तब्दीलियां लाया हूँ
मैं अपने आप में लेकिन,
बस तुमको याद करने की
वो आदत अब भी वाकी है।
आशिकों में और उसका नाम रौशन हो गया,
शमाँ ने सोचा था मिट जायेगा परवाने का नाम।
छोड़ तो सकता हूँ मगर
छोड़ नहीं पाता उसे,
वो शख्स मेरी बिगड़ी हुई
आदत की तरह है।
हो गया ढेर वहीं आह भी निकली न कोई,
जाने क्या बात कहीं शमाँ ने परवाने से।
समन्दर के सफर में किस्मतें पहलू बदलती हैं,
अगर तिनके का होगा तो सहारा डूब जायेगा,
मिसालें दे रहे थे लोग जिसकी कल तलक हमको,
किसे मालूम था वो भी सितारा डूब जायेगा।
चाहत की महफ़िल मैं बुलाया है किसी ने,
खुद बुला के फिर सताया है किसी ने,
जब तक जली है शमा, जलता रहा परवाना,
क्या इस तरह साथ निभाया है किसी ने।
है शिद्दत-ए-खुलूस भी इक जुर्मे-आशिकी,
परवाना जल के शमाँ को बदनाम कर गया।
रूख-ए-रौशन के आगे शमाँ रखकर वो ये कहते है,
उधर जाता है देखें या इधर आता है परवाना।
यह कहके आखिरे-शब शमाँ हो गई खामोश,
किसी की जिंदगी लेने से जिंदगी न मिली।
हमारी मोहब्बत मजबूर कर देगी आपको,
इसलिए हम दिल को बिछाए बैठे हैं,
तुमको कभी न कभी आना ही पड़ेगा,
इसलिए हम #शमा जलाए बैठे हैं।
फना होने में सोज-ए-शमाँ की मिन्नतकशी कैसी,
जले जो आग में अपनी उसे परवाना कहते हैं।
ज़रा-सी देर में दिलकश नज़ारा डूब जायेगा,
ये सूरज देखना सारे का सारा डूब जायेगा,
न जाने फिर भी क्यों साहिल पे तेरा नाम लिखते हैं,
हमें मालूम है इक दिन किनारा डूब जायेगा,
इश्क क्या चीज है यह पूछिये परवाने से,
जिंदगी जिसको मयस्सर हुई मर जाने के बाद।
आँखों से मेरे इस लिए लाली नहीं जाती,
यादों से कोई रात खा़ली नहीं जाती।
आशिकों में और उसका नाम रौशन हो गया,
शमाँ ने सोचा था मिट जायेगा परवाने का नाम।
बिन जले शमा के परवाना जल नहीं सकता,
क्या करे इश्क अगर हुस्न की सबकत न करे।
जो किस्मत में जलना ही था तो शमा होते,
कि पूछे तो जाते किसी अंजुमन में हम।
जो जलाता है किसी को खुद भी जलता है जरूर,
शम्मा भी जलती रही परवाना जल जाने के बाद।
खुद भी जलती है अगर उस को जलाती है ये,
कम किसी तरह नहीं शम्मा भी परवाने से।
बेसबब इश्क़ में मरना तो मुझे मंज़ूर नहीं,
शमा तो चाह रही है कि परवाना हो जाऊँ।
कुछ रिश्ते उम्र भर अगर बेनाम रहे तो अच्छा है,
आँखों आँखों में ही कुछ पैगाम रहे तो अच्छा है,
सुना है मंज़िल मिलते ही उसकी चाहत मर जाती है,
गर ये सच है तो फिर हम नाकाम रहें तो अच्छा है,
जब मेरा हमदम ही मेरे दिल को न पहचान सका,
फिर ऐसी दुनिया में हम गुमनाम रहे तो अच्छा है।
अब उम्र ना मौसम ना रास्ते के वो पत्ते,
इस दिल की मगर ख़ाम ख्याली नहीं जाती।
माँगे तू अगर जान भी तो हँस कर तुझे दे दूँ,
तेरी तो कोई बात भी टाली नहीं जाती।

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मालूम हमें भी हैं बहुत से तेरे क़िस्से,
पर बात तेरी हमसे उछाली नहीं जाती।
सफ़ीना हो के हो पत्थर, हैं हम अंज़ाम से वाक़िफ़,
तुम्हारा तैर जायेगा हमारा डूब जायेगा,
छोड़ आयी थी मैं तेरा वो शहर,
सोच के ये की भूल जाउंगी तुझे मैं,
पर इतनी दूर आकर भी न भूल पायी मैं तुझे,
सोच के ये की तड़पाऊंगी तुझे मैं,
पर तड़पती रही मैं खुद इतनी,
जैसे #शमा जलती है #परवाने के लिए।
मेरे पहलु में भी एक शमा जला करती है
जिसकी लौ से तेरी तस्वीर बना करती है,
सामने तेरे होठ खुलते ही नहीं मगर,
दिल में जो बात है वो आँख बयां करती है,
क्यों हो गुमसुम हमसे कोई बात करो ऐ-दिलवर,
ऐसे ख़ामोशी से तो तकलीफ बड़ा करती है,
शमा जलती है तो ज़माने को पता चलता है,
दिल के जलने की खबर आखिर किसको हुआ करती है।
कितने परवाने जले राज़ ये पाने के लिए,
शमां जलने के लिए हैं या जलाने के लिए।
किसी को प्यार का मतलब बस इतना सा समझाना,
शमा के पास जाकर के परवाने का जल जाना।
शमा बुझा के रात देर तलक महफ़िल सजाई हमने,
मैं अपने दिल को रोता रहा और ये दिल तेरे लिए।
गर्मी-ए-शम्मा का अफसाना सुनाने वालो,
रक्स देखा नहीं तुमने अभी परवाने का।
हो गया ढेर वहीं आह भी निकली न कोई,
जाने क्या बात कहीं शमाँ ने परवाने से।
है शिद्दत-ए-खुलूस भी इक जुर्मे-आशिकी,
परवाना जल के शमाँ को बदनाम कर गया।
रूख-ए-रौशन के आगे शमाँ रखकर वो ये कहते है,
उधर जाता है देखें या इधर आता है परवाना।
यह कहके आखिरे-शब शमाँ हो गई खामोश,
किसी की जिंदगी लेने से जिंदगी न मिली।
फना होने में सोज-ए-शमाँ की मिन्नतकशी कैसी,
जले जो आग में अपनी उसे परवाना कहते हैं।
कितने परवाने जले राज़ ये पाने के लिए,
शमां जलने के लिए हैं या जलाने के लिए।
इश्क क्या चीज है यह पूछिये परवाने से,
जिंदगी जिसको मयस्सर हुई मर जाने के बाद।
बिन जले शमा के परवाना जल नहीं सकता,
क्या करे इश्क अगर हुस्न की सबकत न करे।
जो जलाता है किसी को खुद भी जलता है जरूर,
शम्मा भी जलती रही परवाना जल जाने के बाद।
किसी को प्यार का मतलब बस इतना सा समझाना,
शमा के पास जाकर के परवाने का जल जाना।
खुद भी जलती है अगर उस को जलाती है ये,
कम किसी तरह नहीं शम्मा भी परवाने से।