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Rahat Indori Shayari In Hindi

Rahat Indori Shayari In Hindi
आँख में पानी रखो , होंटों पे चिंगारी रखो, ज़िंदा रहना है तो , तरकीबें बहुत सारी रखो.
कुछ लोग आए थे मेरा दुख बाँटने, मैं जब खुश हुआ तो खफा होकर चल दिये.
क्यों सताते हो मुझे यूँ दुरियाँ बढ़ाकर, क्या तुम्हे मालूम नहीं अधूरी हो जाती है तुझ बिन जिन्दगी.
लिख देना ये अल्फाज मेरी कबर पे, मौत अच्छी है मगर दिल का लगाना अच्छा नहीं.
मजा चखा के ही माना हूं मैं भी दुनिया को, समझ रही थी ऐसे ही छोड़ दूंगा उसे.
मैंने अपनी ख़ुश्क आँखों से लहू छलका दिया, इक समुंदर कह रहा था मुझ को पानी चाहिए.
ये जा के मील के पत्थर पे कोई लिख आये, वो हम नहीं हैं, जिन्हें रास्ता चलाता है.
सरहदों पर तनाव हैं क्या, ज़रा पता तो करो चुनाव हैं क्या, शहरों में तो बारूदो का मौसम हैं, गाँव चलों अमरूदो का मौसम हैं.
सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें, जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहें, शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम, आंधी से कोई कह दे की औकात में रहें.
बुलाती है मगर जाने का नहीं, ये दुनिया है इधर जाने का नहीं.
बोतलें खोल कर दो, आज दिल खोल कर भी पी जाए.
रोज़ तारों को नुमाइश में खलल पड़ता हैं, चाँद पागल हैं अंधेरे में निकल पड़ता हैं.
देख कर उसको तेरा यूँ पलट जाना, नफरत बता रही है तूने मोहब्बत गज़ब की थी.
हर एक हर्फ़ का अंदाज़ बदल रखा है, आज से हमने तेरा नाम ग़ज़ल रखा है.
लू भी चलती थी तो बादे-शबा कहते थे, पांव फैलाये अंधेरो को दिया कहते थे, उनका अंजाम तुझे याद नही है शायद, और भी लोग थे जो खुद को खुदा कहते थे.
बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए, मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए.
रेंगने की भी इजाज़त नहीं हम को वर्ना, हम जिधर जाते नए फूल खिलाते जाते.
कभी भी ख़ुशी मे शायरी नहीं लिखी जाती है, ये वो धुन है जो दिल टूटने पर बनती है.
मैं आख़िर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता, यहाँ हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी थी.
एक ही नदी के हैं ये दो किनारे दोस्तो, दोस्ताना ज़िंदगी में मौत से यारी रखो.
कभी महक की तरह हम गुलों से उड़ते हैं, कभी धुएं की तरह पर्वतों से उड़ते हैं, ये केचियाँ हमें उड़ने से खाक रोकेंगी, की हम परों से नहीं हौसलों से उड़ते हैं.
अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे, फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे, ज़िन्दगी है तो नए ज़ख्म भी लग जाएंगे, अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे.
नयी हवाओं की सोहबत बिगाड़ देती हैं, कबूतरों को खुली छत बिगाड़ देती हैं, जो जुर्म करते है इतने बुरे नहीं होते, सज़ा न देके अदालत बिगाड़ देती हैं.
छू गया जब कभी ख़याल तेरा, दिल मेरा देर तक धड़कता रहा, कल तेरा जिक्र छिड़ गया था घर में, और घर देर तक महकता रहा.
ख़याल था कि ये पथराव रोक दें चल कर, जो होश आया तो देखा लहू लहू हम थे.
मंज़िलों से गुमराह भी ,कर देते हैं कुछ लोग, हर किसी से रास्ता पूछना अच्छा नहीं होता.
फैसला जो कुछ भी हो, मंज़ूर होना चाहिए, जंग हो या इश्क़ हो भरपूर होना चाहिए.
हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे, कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते.
हाथ खाली हैं तेरे शहर से जाते-जाते, जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते, अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है, उम्र गुजरी है तेरे शहर में आते जाते.
उसकी याद आई हैं, साँसों ज़रा धीरे चलो, धड़कनो से भी इबादत में , खलल पड़ता हैं.
सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में, किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है.
आते जाते हैं कई रंग मेरे चेहरे पर, लोग लेते हैं मजा ज़िक्र तुम्हारा कर के.
अजीब लोग हैं मेरी तलाश में मुझको, वहाँ पर ढूंढ रहे हैं जहाँ नहीं हूँ मैं, मैं आईनों से तो मायूस लौट आया था, मगर किसी ने बताया बहुत हसीं हूँ मैं.
तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो, मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो,
घर के बाहर ढूंढता रहता हूं दुनिया, घर के अंदर दुनिया डेरी रहती है.
अफवाह थी की मेरी तबियत ख़राब हैं, लोगो ने पूछ पूछ के बीमार कर दिया,
न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा, हमारे पाँव का काँटा सिर्फ हमीं से निकलेगा.
नए सफ़र का नया इंतज़ाम कह देंगे, हवा को धुप, चरागों को शाम कह देंगे, किसी से हाथ भी छुप कर मिलाइए, वरना इसे भी मौलवी साहब हराम कह देंगे.
एक मुलाकात का जादू की उतरता ही नहीं,तेरी खुशबू मेरी चादर से नहीं जाती है.
दोस्ती जब किसी से की जाये, दुश्मनों की भी राय ली जाए, बोतलें खोल के तो पि बरसों., आज दिल खोल के पि जाए.
बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर, जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ.
कॉलेज के बच्चे चुप हैं एक कागज की नाव के लिए, चारों तरफ दरिया की सूरत हुई बेकारी है.
जवान आँखों के जुगनू चमक रहे होंगे, अब अपने गाँव में अमरुद पक रहे होंगे, भुलादे मुझको मगर, मेरी उंगलियों के निशान, तेरे बदन पे अभी तक चमक रहे होंगे.
बहुत गुरूर है दरिया को अपने होने पर, जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ.
हमारे मुंह से जो निकले वही सदाक़त है, हमारे मुंह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है.
साँसों की सीडियों से उतर आई जिंदगी, बुझते हुए दिए की तरह, जल रहे हैं हम.