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Nigahein Shayari

तेरी निगाहों में देख मदहोशी छाने लगती है
तेरी नज़रें मेरी नज़रों से नींदे चुराने लगती है
कुछ पल के लिए निगाहों से निगाहें मिला लो
हमारे दिल को थोड़ा सुकून पहुंचा दो
कभी देखो मेरी निगाहों में
और थोड़ा इसमें खो जाओ
मेरी निगाहों में भरा है प्यार
इसे समझो और मेरे हो जाओ
जब भी देखें तुझे यह निगाहें
फिर तुझे ही देखते रहना चाहें
निगाहों से तीर तुम चला रही हो
नज़रों से मुझे पागल बना रही हो
यह कैसा जादू किया है तुमने
मेरे सीने से दिल लेकर जा रही हो
कुछ पल बेठो मेरे साथ
मेरे हाथों में रख दो अपना हाथ
निगाहों से मिला कर निगाहें
तुमसे करनी है दिल की बात
बहुत दिन बाद यह रात आयी है
तू मुझसे मिलने मेरे पास आई है
निगाहों से नज़रें मिलाकर
तुमने इस दिल की प्यास जगाई है
दिल मेरा खो जाता है
सब भूल कर तेरा हो जाता है
जब तू अपनी नशीली निगाहें
मेरी नज़रों से मिलाता है
तेरी निगाहों में कहीं खो जाना चाहता हूँ
तुझे दिल देकर मै तेरा हो जाना चाहता हूँ
दिल मेरे में एक बेचैनी सी छाने लगती है
तू जब किसी और से निगाहें मिलाने लगती है

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फिर न कीजे मेरी गुस्ताख निगाहों का गिला,
देखिये आपने फिर प्यार से देखा मुझको।
सौ सौ उम्मीदें बंधती है, इक-इक निगाह पर,
मुझको न ऐसे प्यार से देखा करे कोई।
क्या पूछते हो शोख निगाहों का माजरा,
दो तीर थे जो मेरे जिगर में उतर गये।
निगाहे-लुत्फ से इक बार मुझको देख लेते है,
मुझे बेचैन करना जब उन्हें मंजूर होता है।
कुछ नहीं कहती निगाहें मगर,
बात पहुँची है कहाँ से कहाँ।
उतर चुकी है मेरी रूह में किसी की निगाह,
तड़प रही है मेरी ज़िंदगी किसी के लिए।