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Dard Bhari Shayari

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तेरे ऐसे सच्चे आशिक़ है हम
दिलमे जिसके प्यार न हो कभी कम
सच्चे प्यार में तो ज़िन्दगी महक जाती है
ना जाने हमारी आँखे क्यों है नम
रोता वही है जिसने कद्र किया हो सच्चा रिश्ता को
मतलब पे रिश्ते रखने वालो को कोई रुला नहीं सकता
मंजिलों से बेगाना आज भी सफ़र मेरा,
है रात बेसहर मेरी दर्द बेअसर मेरा।
अब तो हाथों से लकीरें भी मिटी जाती हैं,
उसे खोकर मेरे पास रहा कुछ भी नहीं।
लोग जलते रहे मेरी मुस्कान पर,
मैंने दर्द की अपने नुमाईश न की
जब जहाँ जो मिला अपना लिया,
जो न मिला उसकी ख्वाहिश न की।
यूँ तो हर एक दिल में दर्द नया होता है,
बस बयान करने का अंदाज़ जुदा होता है,
कुछ लोग आँखों से दर्द को बहा लेते हैं
और किसी की हँसी में भी दर्द छुपा होता है।
मेरे इस दर्द की वजह भी वो हैं,
और मेरे दर्द की दवा भी तो वो हैं,
वो नमक ज़ख्मों पे लगाते हैं तो क्या,
मोहब्बत करने की वजह भी तो वो हैं।
एक नया दर्द मेरे दिल में जगा कर चला गया,
कल फिर वो मेरे शहर में आकर चला गया,
जिसे ढूंढते रहे हम लोगों की भीड़ में,
मुझसे वो अपने आप को छुपा कर चला गया।
तुमको लेकर मेरा ख्याल नही बदलेगा
साल बदलेगा मगर दिल का हाल नहीं बदलेगा
जख्म ही देना तो पूरा जिस्म तेरे हवाले था
बे रहम तूने वार क्या वो भी दिल ही वार क्या
बदले हुए लोगो के बारे मैं क्या कहू यारो
मैंने अपने ही प्यार को किसी और का होते देखा है
नज़र और नसीब में भी क्या इत्तफ़ाक़ है
नज़र उसे ही पसंद करती है जो नसीब में नही होता
कल रात वो शख्स मेरे खवाबो का भी काटल कर गया
लोग कितना मुक़ाम रखते है छोड़ जाने के बाद
मै मर जाऊ तो उसे खार तक भी ना होने देना
वो सख्श मसरूफ बहुत है कही उसका वक़्त बर्बाद न हो जाये
कितना मुश्किल है मोहब्बत की कहानी लिखना
जैसे पानी से पानी पे पानी लिखना
मिलता भी नहीं तुम्हारे जैसे इस शहर में
हमको क्या मालूम था के तुम भी किसी और के हो
तुझे पाने की तमन्ना दिल से निकाल दी मैंने
मगर आँखों को तेरे इंतज़ार की आदत सी बन गयी है
बहुत जुदा है औरों से मेरे दर्द की कहानी
ज़ख्म का कोई निशान नहीं और दर्द की कोई इंतहा नही
वो मुझे से बिछड़े तो जैसे बिछड़ गयी ज़िन्दगी
मैं ज़िंदा तो हूँ पर ज़िंदा नहीं रहा
तेरे नफरत से भी मैंने रिश्ता निभाया है
तूने बार बार मुझे फाल्तू होने का अहसास दिलाया है
कोई मरता नहीं किसी ले लिए ये सच है
मगर ये सच है कोई मर मर के जीता है किसी के लिए
अभी मसरुफ हूँ काफी फुर्सत में सोचूंगा तुम्हे
के तुझे याद रखने में क्या क्या भूले है हम
मोहब्बत छोड़ कर हर एक जुर्म कर लेना
वरना तुम भी मुसाफिर बन जाओगे तनहा रातों के
भूल जाना तो दुनिया का रसम है दोस्त
तुमने भुला दिया तो कोण का कमाल कर दिया
हम कहीं जायेंगे बना लेंगे जगह अपने लिए
हम को आता है दिल में उतर जाना
चाँद के रूप में आते ही नहीं तुम
गम की रातों मैं अज़ाब जनस बहार होता
अगर बिकने पे आ जाओ तो घट जाते है दाम अक्सर
न बिकने का इरादा हो तो कीमत और बढ़ती है
वो बेवफा यूँ ही बदनाम हो गया
हजारो चाहने वाले थे किस किस से प्यार करता
किस दर्द को लिखते हो इतना डूब कर,
एक नया दर्द दे दिया है उसने ये पूछकर।
एक दो ज़ख्म नहीं जिस्म है सारा छलनी,
दर्द बेचारा परेशान है कहाँ से निकले।
हमें देख कर जब उसने मुँह मोड़ लिया,
एक तसल्ली हो गयी चलो पहचानते तो हैं।
अब दर्द उठा है तो गज़ल भी है जरूरी,
पहले भी हुआ करता था इस बार बहुत है।
वो तो अपना दर्द रो-रो कर सुनाते रहे,
हमारी तन्हाइयों से भी आँख चुराते रहे,
हमें ही मिल गया खिताब-ए-बेवफा क्योंकि,
हम हर दर्द मुस्कुरा कर छुपाते रहे।
हँसते हुए ज़ख्मों को भुलाने लगे हैं हम,
हर दर्द के निशान मिटाने लगे हैं हम,
अब और कोई ज़ुल्म सताएगा क्या भला,
ज़ुल्मों सितम को अब तो सताने लगे हैं हम।
दर्द हमने संभाला है हमने आँसू बहाए हैं,
बेशक वजह तुम थे पर दिल तो हमारा था।
ज़हर देता है कोई कोई दवा देता है,
जो भी मिलता है मेरा दर्द बढ़ा देता है।
मसरूफियत में आती है बेहद तुम्हारी याद
फुर्सत में तेरी याद से फुरसत नहीं मिलती

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साकी को गिला है के बिकती नहीं शराब
और एक नाम है के होश में आने नहीं देता
ना किया कर अपने दर्द को
शायरी में बयान ऐ दिल,
कुछ लोग टूट जाते हैं
इसे अपनी दास्तान समझकर।
हम ने कब माँगा है तुम से
अपनी वफ़ाओं का सिला,
बस दर्द देते रहा करो
मोहब्बत बढ़ती जाएगी।
दर्द है दिल में पर इसका एहसास नहीं होता,
रोता है दिल जब वो पास नहीं होता,
बर्बाद हो गए हम उसके प्यार में,
और वो कहते हैं इस तरह प्यार नहीं होता।
नफ़रत करना तो हमने कभी सीखा ही नहीं,
मैंने तो दर्द को भी चाहा है अपना समझ कर।
मेरी हर शायरी दिल के दर्द को करेगी बयाँ,
तुम्हारी आँख ना भर आयें कहीं पढ़ते पढ़ते।
ज़ख्म दे कर ना पूछ तू मेरे दर्द की शिद्दत,
दर्द तो फिर दर्द है कम क्या ज्यादा क्या।
लोग कहते है हम मुस्कुराते बहुत है,
और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते।
वो जान गयी थी हमें दर्द में मुस्कराने की आदत है,
देती थी नया जख्म वो रोज मेरी ख़ुशी के लिए।
मोहब्बत ख़ूबसूरत होगी किसी और दुनिया में,
इधर तो हम पर जो गुज़री है हम ही जानते हैं।
मुझे क़बूल है हर दर्द, हर तकलीफ़ तेरी चाहत में..
सिर्फ़ इतना बता दे, क्या तुझे मेरी मोहब्बत क़बूल है?
लोग कहते है हर दर्द की एक हद होती है,
शायद उन्होंने मेरा हदों से गुजरना नहीं देखा।
प्यार सभी को जीना सिखा देता है,
वफ़ा के नाम पे मरना सिखा देता है,
प्यार नहीं किया तो करके देख लो यार,
ज़ालिम हर दर्द सहना सिखा देता है।
प्यार मुहब्बत का सिला कुछ नहीं,
एक दर्द के सिवा मिला कुछ नहीं,
सारे अरमान जल कर ख़ाक हो गए,
लोग फिर भी कहते हैं जला कुछ भी नहीं।
जिस दिल पे चोट न आई कभी,
वो दर्द किसी का क्या जाने,
खुद शम्मा को मालूम नहीं,
क्यूँ जल जाते हैं परवाने।
दर्द से हाथ न मिलाते तो और क्या करते,
गम में आँसू न बहते तो और क्या करते,
उसने मांगी थी हमसे रौशनी की दुआ,
हम अपना दिल न जलाते तो और क्या करते।
कौन तोलेगा हीरों में अब तुम्हारे आंसू फ़राज़,
वो जो एक दर्द का ताजिर था दुकां छोड़ गया।
आँखें खुली तो जाग उठी हसरतें फराज़,
उसको भी खो दिया जिसे पाया था ख्वाब में।
सजा कैसी मिली हमको तुझसे दिल लगाने की,
रोना ही पड़ा जब कोशिश की मुस्कुराने की,
कौन बनेगा यहाँ मेरी दर्द भरी रातों का हमराज,
दर्द ही मिला है जो तूने कोशिश की आजमाने की।
ना कर तू इतनी कोशिशे,
मेरे दर्द को समझने की,
पहले इश्क़ कर,
फिर ज़ख्म खा,
फिर लिख दवा मेरे दर्द की।
बिछड़ के तुम से ज़िंदगी सज़ा लगती है,
यह साँस भी जैसे मुझ से ख़फ़ा लगती है,
तड़प उठता हूँ मैं दर्द के मारे,
ज़ख्मों को जब तेरे शहर की हवा लगती है,
अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किस से करूँ,
मुझ को तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफ़ा लगती है।
तू है सूरज तुझे मालूम कहाँ रात का दर्द,
तू किसी रोज मेरे घर में उतर शाम के बाद।
शायरी में कहाँ सिमटता है दर्द-ए-दिल दोस्तो,
बहला रहे हैं खुद को जरा कागजों के साथ।
आरजू नहीं के ग़म का तूफान टल जाये,
फ़िक्र तो ये है तेरा दिल न बदल जाये,
भुलाना हो अगर मुझको तो एक एहसान करना,
दर्द इतना देना कि मेरी जान निकल जाये।
दिल में है जो दर्द वो दर्द किसे बताएं,
हंसते हुए ये ज़ख्म किसे दिखाएँ,
कहती है ये दुनिया हमे खुश नसीब,
मगर इस नसीब की दास्ताँ किसे बताएं।
इस तरह मेरी तरफ मेरा मसीहा देखे,
दर्द दिल में ही रहे और दवा हो जाए।
जिंदगी को मिले कोई हुनर ऐसा भी,
सबमे मौजूद भी हो और फना हो जाए।
मोहब्बत का मेरे सफर आख़िरी है,
ये कागज कलम ये गजल आख़िरी है,
मैं फिर ना मिलूँगा कहीं ढूंढ लेना,
तेरे दर्द का अब ये असर आख़िरी है।