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Bollywood Shayari

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काटे नहीं कटते लम्हे इंतज़ार के,
नजरें बिछाए बैठे हैं रस्ते पे यार के,
दिल ने कहा देखे जो जलवे हुस्न-ए-यार के,
लाया है उन्हें कौन फलक से उतार के।
फूल खिलते हैं बहारों का समा होता है,
ऐसे मौसम में ही तो प्यार जवां होता है,
दिल की बातों को होठों से नहीं कहते,
ये फ़साना तो निगाहों से बयाँ होता है।
काटे नहीं कटते लम्हे इंतज़ार के,
नजरें बिछाए बैठे हैं रस्ते पे यार के,
दिल ने कहा देखे जो जलवे हुस्न-ए-यार के,
लाया है उन्हें कौन फलक से उतार के।
मैं और मेरी तन्हाई ,
अक्सर यह बातें करते हैं ,
तुम होती तो कैसा होता ,
तुम ये कहती ,
तुम वो कहती ,
तुम इस बात पे हैरान होती ,
तुम उस बात पे कितनी हंसती ,
तुम होती तो ऐसा होता ,
तुम होती तो वैसा होता ,
मैं और मेरी तन्हाई
फूल खिलते हैं बहारों का समा होता है,
ऐसे मौसम में ही तो प्यार जवां होता है,
दिल की बातों को होठों से नहीं कहते,
ये फ़साना तो निगाहों से बयाँ होता है।
एक पल में जो आकर गुजर जाये,
ये हवा का वो झोका है और कुछ नहीं,
प्यार कहती है दुनिया जिसे,
एक रंगीन धोखा है और कुछ नहीं।
सारे जहां का दर्द समेट कर,
जब कुछ न बन सका तो,
उसने तुम्हारी यह दो आँखें बना दी।
नसीब अच्छे ना हुआ तो खूबसूरती का क्या फ़ायदा
दिलों के शहंशा अक्सर फकीर हुआ करते हैं
एक तरफा प्यार की ताकत ही
कुछ और होती है,
और रिश्तों की तरह ये दो लोगों में नही बंटती,
इसमे सिर्फ मेरा हक है।।
दिल से हमे भुलाओगे कैसे,
हम वो खुशबू हैं जो साँसों में बसते हैं,
ख़ुद की साँसों को रोक पाओगे कैसे.
ऐसा लगा ख़ुदा ने रख दिया हमारे दिल पर हाथ,
लिया नाम हमारा उन्होंने कुछ ऐसी अदा के साथ.
बैठी हैं होंठो को सीकर पछतायेंगी आप,
इश्क़ अक्सर जाग उठता है ऐसी ख़ामोशी के बाद.
दर्द से आँखे चार कर लेंगे,
हम भी इम्तिहान दे देंगे,
तेरी दोस्ती के खातिर ऐ दोस्त
हम दुश्मनों से भी प्यार कर लेंगे.
बेख़ुदी की जिन्दगी हम जिया नही करते,
जाम दूसरों के हाथों से छीनकर पिया नही करते,
उनको मोहब्बत हैं तो आकर इजहार करें,
पीछा हम भी किसी का किया नही करते.
आग सूरज में होती हैं, जलना ज़मीन को पड़ता हैं,
मोहब्बत निगाहें करती हैं, तड़पना दिल को पड़ता हैं
तेरे दिल में मेरी साँसों को पनाह मिल जाए,
तेरे इश्क़ में मेरी जान फ़ना हो जाए
अधूरी सांस थी धड़कन अधूरी थी अधूरें हम,
मगर अब चाँद पूरा है फलक पे और अब पूरें हैं हम
आंखे तो प्यार में, दिल की जुबान होती हैं,
सच्ची चाहत तो सदा बेजुबान होती हैं,
प्यार में दर्द भी मिले तो क्या घबराना,
सुना है दर्द से चाहत और जवां होती हैं
सौ अंधेरों में भी रोशन हो उस हक़ीक़त की तलाश है
तेरी दहलीज़ पर छोड़ आए उस मोहब्बत की तलाश है
झुके तो इबादात समझे जमाने वाले
मिटने पे जो हासिल हो उस ज़नत की तलाश है
कोई तो जलवा खुदा के वास्ते दीदार के काबिल दिखाई दे
संगदिल तोह मिल चुके है सैंकड़ो
कोई अिल -ऐ- दिल तो दिखाई दे
रोने दे तू आज हमको तू आँखे सुजाने दे,
बाहों में लेले और खुद को भीग जाने दे.
है जो सीने में क़ैद दरिया वह छूट जायेगा,
है इतना दर्द कि तेरा दामन भीग जायेगा
बस अब एक हाँ के इंतज़ार में रात यूँही गुज़र जायेगी,
अब तो बस उलझन है साथ मेरे नींद कहाँ आएगी,
सुबह की किरण न जाने कौनसा सन्देश लाएगी,
रिमझिम इस गुंगुनायेगी या प्यास अधूरी रह जायेगी
आज उतनी भी नहीं मेह्खाने में ,
जितनी हम छोड़ दिया करते थे पैमाने में

Top Shayari Posts

हर यार वफादार नहीं होता ,
हर पत्थर चमकदार नहीं होता ,
न जाने वन में कितने फूल खिले हैं ,
हर फूल खुशबूदार नहीं होता .
पानी से प्यास नहीं बुझी तो मैखाने की तरफ चल निकला,
सोचा शिकायत करूँ तेरी खुदा से, पर खुदा भी तेरा आशिक निकला
ऐ ख़ुदा आज ये फ़ैसला कर दें,
उसे मेरा या मुझे उसका कर दें,
बहुत दुःख सहे है मैंने,
कोई ख़ुशी अब तो मुकरर कर दें,
बहुत मुश्किल लगता है उससे दूर रहना,
जुदाई के सफ़र को कम कर दें,
जितना दूर चले गए वो मुझसे,
उसे उतना क़रीब कर दें,
नहीं लिखा अगर नसीब में उसका नाम,
तो खत्म कर ये जिंदगी और मुझे फ़ना कर दें
आसमानों से कहो अगर हमारी उड़ान देखनी हो
तो अपना कद और ऊँचा कर लें,
हुस्न वालों से कहो कि अगर इश्क देखना हो
तो हमसे आकर मिलें
हूँ मैं परवाना मगर कोई शम्मा तो हो,
रात तो हो, जान देने को हूँ हाज़िर
पर कोई बात तो हो
मोहब्बत रंग लाती हैं जब दिल से दिल मिलते हैं,
मुश्किल तो यह है कि दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं
ना जागते हुए ख्वाब देखा करों
ना चाहों उससे जिसे पा न सकों
प्यार कहाँ किसी का पूरा होता हैं,
प्यार का पहला अक्षर अधूरा होता हैं
उन्हें हुसमे शिकायत है कि हूम हर किसी को देख कर मुस्कुराते हैं,
नासमझ है वो न समझे कि हमें तो हर चेहरे में वही नज़र आते हैं
तुमसा कोई और इस ज़मीन पे हुआ,
तो रब से शिकायत होगी,
तुम्हें चाहने वाला कोई और हुआ,
तो क़यामत से पहले क़यामत होगी.
फलक के तीर का क्या देख निशाना था,
उधर थी बिजली इधर मेरा आशियाना था,
पहुँच रही थी किनारे पे कश्ती-ए-उम्मीद,
उस ही वक्त इस तूफ़ान को भी आना था
तूफ़ान में बहा है न यह शोलों में जला हैं,
घयाल हुआ तीरों से ना खंजर से कटा हैं,
कहते है जिससे इश्क क़यामत है, बला है ,
टकराया जो भी इससे वो दुनिया से मिटा हैं
क्यों बनाती हो तुम रेत के महल,
जिसे खुद ही तोड़ डालोगी तुम,
आज कहती हो इस दिलजले से प्यार है तुम्हे,
कल तो मेरा नाम तक भूल जाओगी तुम
बाबूजी ने कहा गाओं छोड़ दो
सब ने कहा पारो को छोड़ दो
पारो ने कहा शराब छोड़ दो
आज तुमने कह दिया हवेली छोड़ दो
एक दिन आएगा जब वह कहेंगे,
दुनिया ही छोड़ दो
कभी कभी जीतने के लिए
कुछ हारना भी परता है …
और हार कर जीतने वाले को
बाज़ीगर कहते
उफ़ यह संग -ऐ -मर्मर सा तराशा हुआ शफाफ बदन
देखने वाले तुझे ताज महल कहते है